भारत में कई किसान ऐसे हैं जिनके पास 5 एकड़ से भी कम जमीन है। यहां हम जिस तरीके की चर्चा करेंगे उससे किसानों के लिए हर महीने अच्छी आय… Read More
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भारत में कई किसान ऐसे हैं जिनके पास 5 एकड़ से भी कम जमीन है। यहां हम जिस तरीके की चर्चा करेंगे उससे किसानों के लिए हर महीने अच्छी आय… Read More
तीसरी मंजिल, एसटीपीआई बिल्डिंग,
विकास नगर, शिमला (हि.प्र.)
पिनकोड - 171009
गांव - सिधरोटी, डाकघर - लोअरकोटी,
तहसील रोहड़ू, जिला शिमला (हि.प्र.)
पिनकोड-171207
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भारत में कृषि उपज के विपणन हेतु किसानों को आढ़तियों व लदानियों के ऊपर आश्रित रहना पड़ता है व बाजार में ऐसा माहौल बन गया है कि किसानों को कई बार उत्पादन लागत से भी कम दाम मिलते हैं और कई बार कुछ आढ़ती किसान को उनकी उपज का भुगतान बहुत देर से करते हैं या करते ही नहीं।
ऐसी भी परिस्थितियाँ बनती रहती हैं कि किसानों को अपने उत्पाद फेंकने पड़ते हैं जिसकी वजह से कुछ किसानों ने आत्महत्या भी की।
मार्किट में मांग और सप्लाई का समन्वय नहीं हो पाता, जिसकी वजह से मूल्य में बहुत असमानता देखने को मिलती है। इसके अलावा मंडी में पारदर्शिता की कमी के कारण भी किसानों को बहुत कम मूल्य मिल पाते हैं।
छोटे किसानों को तो अधिकतर बार उत्पादन लागत भी नहीं मिल पाती। यह भी देखने को मिलता है कि परचून मूल्य का 60 प्रतिशत से अधिक भाग वितरण प्रणाली में जाता है, जबकि किसानों को 40 प्रतिशत से कम भाग में सभी प्रकार की लागत का प्रबंध करने पर मजबूर होना पड़ता है।
ऊपर से आयातित उत्पाद भी भारतीय कृषि के लिए घातक सिद्ध हो रहे हैं। विभिन्न किसान संघ अपने तौर पर सरकार से मांग करते रहे हैं कि किसानों को लाभदायक दाम देने के लिए नीति होनी चाहिए।
सर्वांगीण कृषि समाधान फाउंडेशन ने किसानों की समस्याओं को देखते हुए विशेष प्रयास किये हैं, जो कृषि उत्पाद हेतु वैकल्पिक वितरण प्रणाली लाकर किसानों को लाभदायक दाम दिलाने में सक्षम हो सकती है।
इस व्यवस्था की सम्पूर्ण जानकारी किसानों के साथ साझा करने व आप सबके सुझाव की अपेक्षा के साथ 27 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक Google Meet पर विशेष वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है।
सभी किसान व बागवान भाइयों से निवेदन है कि आप इस वेबिनार में बढ़-चढ़ कर भाग लें व सभी किसानों के भविष्य को उज्जवल बनाने में सहयोग दें।
सर्वांगीण कृषि समाधान का मानना है कि हमारा देश भारत तभी समृद्ध हो सकता है जब भारत का किसान समृद्ध होगा, क्योंकि देश में 60 प्रतिशत के करीब नागरिक गाँव में रहते हैं और उनका मुख्य व्यवसाय कृषि है।