Krishi Samadhan

पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन

भारत सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को जैविक खेती से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक विशेष पहल शुरू की है, जिसे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन” (Mission Organic Value Chain Development for North Eastern Region – MOVCDNER) कहा जाता है। यह मिशन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 2015-16 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती को बढ़ावा देना, किसानों की आय दोगुनी करना और कृषि क्षेत्र को टिकाऊ बनाना है।

मिशन का उद्देश्य

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत के किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित करना और उन्हें उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक की सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला में सहायता प्रदान करना है। यह मिशन 8 पूर्वोत्तर राज्यों – असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में लागू किया गया है।

मुख्य घटक और कार्य

  1. क्लस्टर आधारित खेती – किसानों को समूहों में संगठित कर 20 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जैविक खेती कराई जाती है।
  2. प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण – किसानों को जैविक कृषि तकनीकों, जैविक उर्वरकों, कीट नियंत्रण और प्रमाणन की प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।
  3. प्रमाणन प्रणाली – जैविक उत्पादों के लिए ‘PGS India’ प्रमाणन प्रणाली के तहत मान्यता दी जाती है, जिससे बाजार में उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ती है।
  4. विपणन सहायता – किसानों को स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच दिलाने के लिए समर्थन दिया जाता है।
  5. प्रोसेसिंग एवं मूल्य संवर्धन – कच्चे उत्पादों की प्रोसेसिंग कर उन्हें मूल्यवर्धित उत्पादों में बदला जाता है, जैसे जैविक हल्दी पाउडर, पैक्ड चाय, आदि।

लाभ

  • किसानों की आमदनी में वृद्धि
  • स्वास्थ्यवर्धक और रसायनमुक्त उत्पादों का उत्पादन
  • पर्यावरण की सुरक्षा और भूमि की उर्वरता में सुधार
  • महिला किसानों की भागीदारी में वृद्धि
  • रोजगार के नए अवसर

निष्कर्ष

पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन किसानों को आत्मनिर्भर बनने का एक सशक्त माध्यम है। इससे न केवल स्थानीय कृषि प्रणाली को मजबूती मिलती है, बल्कि भारत को विश्व जैविक बाजार में एक मजबूत पहचान भी मिल रही है।

यह मिशन पूर्वोत्तर भारत को “जैविक खेती की राजधानी” बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

 

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