Our Archive

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Krishi Samadhan > बीमारी

सेब पपड़ी रोग के सबसे पहले लक्षण, बसंत में पत्तियों पर सूक्ष्म, गोल, जैतून-हरे धब्बों के रूप में नज़र आते हैं। ये अक्सर मुख्य शिरा के आसपास होते हैं। बढ़ने पर ये भूरे-काले पड़ जाते हैं

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स्पाइडर माइटों के खाने से पत्तियों की ऊपरी सतह पर सफ़ेद से पीले रंग के धब्बे हो जाते हैं। जैसे-जैसे संक्रमण और अधिक गंभीर होता जाता है, पहले पत्तियाँ कांसे या चांदी के रंग की दिखने लगती हैं

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पत्तियों की उपरी सतह पर छोटे, चाँदी के रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जिन्हें अंग्रेज़ी में सिल्वरिंग कहा जाता है। ठीक यही प्रभाव फूलों की पंखुड़ियों पर भी हो सकता है, जहाँ से रंग उड़ जाता है।

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नई पत्तियों पर बैंगनी या भूरे रंग के धब्बे होना, इसके आरंभिक लक्षण हैं। ये लक्षण ज़्यादातर पौधे के ऊपरी हिस्से में दिखाई देते हैं। तनों और युवा पत्तियों पर बैंगनी धारियाँ और छोटे गहरे भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं,

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सफ़ेद मक्खियाँ खुले खेतों और ग्रीनहाउसों की कई फ़सलों में आम हैं। लार्वा और वयस्क पौधे के रस का सेवन करते हैं और पत्ती की सतह, तने और फलों पर मधुरस या हनीड्यू छोड़ते हैं।

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नए निकले हुए लार्वा पत्तियों को तेज़ी से खाते हैं, जिसके कारण पत्तियों के ऊतक छिल जाते हैं और वे पूरी तरह झड़ जाती हैं। बड़े होने पर लार्वा फैल जाते हैं और रात में पत्तियों को लगातार खाते हैं।

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धूप से झुलसना सीधी धूप और अत्याधिक तापमान से पौधों, झाड़ियों या पेड़ों को होने वाली क्षति को कहते हैं। ये कारक पौधे के ऊतकों में नमी में परिवर्तन कर देते हैं

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लौह की कमी सबसे पहले नई पत्तियों पर दिखाई देती है। ऊपरी पत्तियों का पीला पड़ना (क्लोरोसिस) जिसमें बीच का हिस्सा और पत्तियों की शिराएं स्पष्ट रूप से हरी रह जाती हैं (अंतःशिरा हरिमाहीनता), इसकी विशेषता है।

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सरल भाषा में कहे, तो पेड़ के पौधों में घाव लगने को कैंकर कहते हैं । सेब के पेड़ में कैंकर बीमारी लगने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन इनमे से प्रमुख कारण फंगस को माना गया है ।

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सरल शब्दों में कहा जाये, तो स्कैब एक फंगल बीमारी होती है, जो सेब की पत्तियों और फल दोनों को प्रभावित करती है । इस बीमारी में पत्तियों और फल पर एक मोटी

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