भारतीय कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का महत्व

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कृषि में सटीकता

भारतीय कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का महत्व-Krishi-samadhan

खेती किसानी में अभी की बड़ी चुनौतियां

भारत के किसानों के सामने अभी कृषि क्षेत्रों में फसलों की व्यवस्था का अभाव है। साथ ही जनसंख्या में हुए व्यापक वृद्धि के कारण विभिन्न हिस्सों में कृषि जोत का आकार छोटा या कम हुआ है। इससे कृषि में बड़े निवेश की संभावनाएं कम होती जा रही हैं। हालांकि पिछले 20 सालों में भारत के किसानों ने अपनी कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में सफलता पाई है जबकि उसके पास पर्याप्त संसाधन और वैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध नहीं है। कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरक खाद और हानिकारक कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोगों से चिंताएं बढ़ी हैं। वहीं कृषि संसाधनों के अनियंत्रित दोहन के कारण मिट्टी की उर्वरता में भारी कमी आ रही है। भंडारण और फूड प्रोसेसिंग न हो पाना भी बड़ी चुनौतियां हैं।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में व्यापक सुधार संभव

कृषि संबंधित विभिन्न कार्यों को आसान बनाने और उनके दबाव को कम करने के लिए यह तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कारगर साबित हो सकती है। इन सबका सीधा असर, संपूर्ण खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के व्यापक सुधार में देखा जा सकता है। यह जानना होगा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में कृषि खाद्य से जुड़े तकनीकी स्टार्टअप 133 सौदों के माध्यम से एक अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश जुटाया है। वही, 2019 में भारत के कृषि उत्पादों का निर्यात 37.4 अरब डॉलर तक पहुंचा, जबकि, आपूर्ति श्रृंखला को और बेहतर भंडारण तथा पैकेजिंग में निवेश के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है। कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कई संभावनाएं जुड़ी हुई हैं। दुनिया का कृषि उद्योग लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर का है। इस पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी तकनीकी के जरिए फसलों के उत्पादन के साथ-साथ कीटों पर नियंत्रण संभव है। मिट्टी और फसल की वृद्धि पर निगरानी की जा सकती है। खेती किसानी से जुड़े सभी डाटा का प्रबंधन किया जा सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए विकास के अवसर

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए विकास के कई अवसर उपलब्ध हैं। आंकड़ों की माने तो वर्ष 2019 में वैश्विक स्तर पर कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग का निवेश लगभग एक अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। ऐसा अनुमान है कि वर्ष 2030 तक 30 प्रतिशत वृद्धि के साथ यह निवेश करीब 8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा। इस परिदृश्य में भारतीय कृषि तकनीक बाजार बहुत पीछे है और क्षमता होने के बावजूद यह अमेरिका की तुलना में मात्र 1 प्रतिशत के स्तर पर ही पहुंच सका है। भारत की विशालता, भौगोलिक विभिन्नता और खेती के अलग-अलग प्रकारों के कारण ये भारतीय कृषि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए उपलब्ध अवसरों को अद्वितीय बनाती है। भारतीय खेती और किसान ना केवल भारत बल्कि विश्व में बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समाधान बनाने में सहायता दे सकते हैं और इनसे व्यापक और समृद्ध डाटा मिल सकेगाण् भारत में मिट्टी के अलग-अलग प्रकार, अलग-अलग जलवायु और खेतों की अलग-अलग आकार प्रकार होने के कारण यहां से जो डाटा प्राप्त होगा, वह वैज्ञानिकों को कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपकरण बनाने और अन्य कृषि समाधान विकसित करने में मददगार साबित होंगे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित फसल उपज पूर्वानुमान मॉडल और सरकारी प्रयास

भारत में किसानों को बेहतर परामर्श उपलब्ध कराने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित फसल उपज पूर्वानुमान मॉडल के विकास पर कार्य शुरू हो चुका है। इसके लिए भारत सरकार ने इसरो की मदद ली है। सरकार, किसानों को सही सलाह देने के लिए औद्योगिक क्षेत्र के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित फसल उपज पूर्वानुमान मॉडल को देश के विभिन्न राज्यों के आकांक्षी जिलों में शुरू कर चुकी है, इस परियोजना में असम, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के जिले शामिल किए गए हैं। इस प्रणाली में इसरो द्वारा दिए गए रिमोट सेंसिंग डाटा के साथ मृदा स्वास्थ्य कार्ड का डाटा, भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा दी गई मौसम की जानकारी, मिट्टी की नमी और तापमान के विश्लेषण संबंधी डेटा का उपयोग किया जाता है। इससे फसल उत्पादकता और मिट्टी में पैदावार बढ़ाने की क्षमता कृषि निवेश के अपव्यय को रोकने और कीट या बीमारी के प्रकोप की भविष्यवाणी करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कृषि में सटीकता

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मौसम, पानी और मृदा की उर्वरता की जानकारी ना होने के कारण कृषि में भारतीय किसान सटीकता के अभाव से परेशान है। यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जाए तो कृषि में सटीकता लाई जा सकती है। इस तकनीक के माध्यम से मिट्टी के विश्लेषण कर कमियां दूर की जा सकेंगे। वहीं। पौधों की बीमारियां कीटों की जानकारी और फसलों के पोषण के बारे में सटीक जानकारी मिल सकेगी जिससे पैदावार सुनिश्चित हो सकेगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंसर खरपतवार को पहचान सकते हैं। उन पर सही खरपतवारनाशक डालकर कृषि उत्पादन में योगदान दे सकते हैं। कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग को सीमित किया जा सकेगा जिससे मानव स्वास्थ्य पर और प्रकृति पर पड़ रहे बुरे असर को कम किया जा सकता है। कृषि आय में होने वाली गिरावट को भी दूर किए जाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग संभव है। कृषि क्षेत्र में कार्य बल की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है। इससे कृषि आय में गिरावट हो रही है। उस कमी को दूर करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं। मानव श्रमिकों के कार्यों में अतिरिक्त समर्थन प्रदान करते हैं और उन्हें कई प्रकार से प्रयोग में लाया जा सकता है। यह अधिक सटीक रूप से खरपतवार को पहचान कर उनको हटाने में भी सक्षम है। इसके माध्यम से कृषि लागत में कमी की जा सकती है। इसके अलावा किसानों द्वारा कृषि से जुड़ी समस्याओं के हल के लिए भी चैटबॉट मददगार साबित हो रहे हैं। कृषि के लिए विशेषज्ञों की सहायता से तैयार किए गए यह विशेष चैटबॉट कई प्रकार के सवालों के सही.सही जवाब दे सकते हैं। साथ ही कृषि समस्याओं पर सलाह और मौसमी सिफारिशें भी देते हैं।

Hindi.news online के सुमित ब्लॉगर से साभार