एंटी–हेल नेट मांग सर्वेक्षण : बागवानों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल
हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में सेब एवं अन्य फलों की बागवानी हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है। लेकिन पिछले वर्षों में तेज़ हुई जलवायु परिवर्तन की घटनाओं—विशेषकर ओलावृष्टि और पक्षियों के हमले—ने फलों की सुरक्षा और उत्पादन क्षमता पर गंभीर प्रभाव डाला है। कई क्षेत्रों में हर साल 2 से 5 बार तक ओलावृष्टि होने के मामले सामने आए हैं, जिससे फलों का आकार, गुणवत्ता, रंग और कुल उत्पादन में भारी गिरावट देखी गई। इस कारण किसानों को आर्थिक नुकसान लाखों रुपये तक पहुँच जाता है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सर्वांगीण कृषि समाधान फाउंडेशन (www.krishisamadhan.org) द्वारा एक विशेष एंटी–हेल नेट डिमांड सर्वेक्षण शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य बागवानों की वास्तविक ज़रूरतों को समझना, एंटी-हेल नेट एवं एंटी-बर्ड नेट की मांग का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना तथा भविष्य में उचित मात्रा में सामग्री उपलब्ध कराने के लिए अग्रिम व्यवस्था करना है।
फाउंडेशन का लक्ष्य है कि बागवानों को उत्तम गुणवत्ता वाली एंटी–हेल नेट और एंटी–बर्ड नेट बाजार से कम दाम पर उपलब्ध करवाई जाए, ताकि वे कम लागत में अधिक सुरक्षा प्राप्त कर सकें। यह सर्वे पूरी तरह नि:शुल्क है और इसमें भाग लेकर बागवान अपनी आवश्यकता, क्षेत्रफल, संरचना, नेट के आकार, प्रकार और गुणवत्ता संबंधी पसंद को साझा कर सकते हैं।
इस सर्वेक्षण के माध्यम से बागवानों से निम्न महत्वपूर्ण जानकारियाँ एकत्र की जा रही हैं:
- वे कितने क्षेत्र में बागवानी करते हैं और किस फसल को नेट से सुरक्षित करना चाहते हैं।
- उनके क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों में ओलावृष्टि कितनी बार हुई और उससे कितना नुकसान हुआ।
- वे कितना क्षेत्र एंटी-हेल नेट से ढकना चाहते हैं तथा किस प्रकार का नेट और संरचना पसंद करते हैं।
- वे फंडिंग के लिए निजी स्रोत, KCC लोन या अन्य विकल्पों में से किसका उपयोग करेंगे।
- अब तक एंटी-हेल नेट न लगाने के प्रमुख कारण जैसे—उच्च लागत, जानकारी का अभाव, सब्सिडी में देरी, या आवश्यकता न होना।
सर्वे का उद्देश्य केवल डेटा एकत्र करना नहीं बल्कि किसानों की सुरक्षा जरूरतों को समझकर भविष्य के लिए एक प्रभावी नीति और कार्ययोजना बनाना है। इससे आने वाले वर्षों में बागवानों को फलों के नुकसान से बचाने में बड़ी सहायता मिलेगी।
इस ऑनलाइन सर्वेक्षण में भाग लेने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 निर्धारित की गई है।
कृपया नीचे दिए गए लिंक पर पंजीकरण करें।
https://survey.krishisamadhan.org/
यदि आप सर्वे फॉर्म भरते हैं और इसे साझा करते हैं, तो आपको रेफ़रल पॉइंट भी दिए जाएंगे।
- सर्वे लिंक शेयर करने पर2 पॉइंट
- आपके रेफ़रल लिंक से कोई व्यक्ति सर्वे पूरा करता है तो5 पॉइंट
| Referral Points | Medal |
| 10 Points | Bronze Medal |
| 25 Points | Silver Medal |
| 50 Points | Gold Medal |
| 100 Points | Platinum Medal |
इन पॉइंट्स का उद्देश्य किसानों के बीच सहयोग की भावना को बढ़ावा देना है। इससे यह भी पता चलेगा कि किसान सामूहिक हित में किस प्रकार एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं और फलों की सुरक्षा के लिए मिलकर प्रयास करना चाहते हैं। सर्वाधिक सक्रिय प्रतिभागियों को फाउंडेशन द्वारा भविष्य में विशेष भूमिकाएँ और सामाजिक जिम्मेदारियाँ भी प्रदान की जा सकती हैं।
निष्कर्ष
ओलावृष्टि और पक्षियों से होने वाला नुकसान बागवानी क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती है। समय पर सही संरक्षण व्यवस्था अपनाकर किसान अपनी मेहनत और आय दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं। एंटी–हेल नेट डिमांड सर्वे इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो बागवानों की जरूरतों के आधार पर भविष्य की योजना और सामग्री उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
सभी बागवानों से निवेदन है कि वे इस सर्वेक्षण में अवश्य भाग लें और सही जानकारी साझा करें। आपका सहयोग संपूर्ण फल उत्पादन क्षेत्र के लिए अत्यंत मूल्यवान है।
जय हिन्द, जय किसान।
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